श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.58

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

जातूकर्ण्यश्‍च तच्छिष्यः सनिरुक्तां स्वसंहिताम्।

बलाकपैजवैतालविरजेभ्यो ददौ मुनिः॥ ५८

jātūkarṇyaśca tacchiṣyaḥ saniruktāṃ svasaṃhitām|

balākapaijavaitālavirajebhyo dadau muniḥ|| 58

अर्थ

शाकल्यके एक और शिष्य थे—जातूकर्ण्यमुनि। उन्होंने अपनी संहिताके तीन विभाग करके तत्सम्बन्धी निरुक्तके साथ अपने शिष्य बलाक, पैज, वैताल और विरजको पढ़ाया॥ ५८॥

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