श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.76

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

सुकर्मा चापि तच्छिष्यः सामवेदतरोर्महान्।

सहस्रसंहिताभेदं चक्रे साम्‍नां ततो द्विजः॥ ७६

sukarmā cāpi tacchiṣyaḥ sāmavedatarormahān|

sahasrasaṃhitābhedaṃ cakre sāmnāṃ tato dvijaḥ|| 76

अर्थ

जैमिनिमुनिके एक शिष्यका नाम था सुकर्मा। वह एक महान् पुरुष था। जैसे एक वृक्षमें बहुत-सी डालियाँ होती हैं, वैसे ही सुकर्माने सामवेदकी एक हजार संहिताएँ बना दीं॥ ७६॥

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