श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.9.18

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

क्वचिच्छोकं क्वचिन्मोहं क्वचिद् दुःखं सुखं भयम्।

क्वचिन्मृत्युमवाप्नोति व्याध्यादिभिरुतार्दितः॥ १८

kvacicchokaṃ kvacinmohaṃ kvacid duḥkhaṃ sukhaṃ bhayam|

kvacinmṛtyumavāpnoti vyādhyādibhirutārditaḥ|| 18

अर्थ

कहीं शोकग्रस्त हो जाते तो कहीं मोहग्रस्त। कभी दुःख-ही-दुःखके निमित्त आते तो कभी तनिक सुख भी मिल जाता। कभी भयभीत होते, कभी मर जाते तो कभी तरह-तरहके रोग उन्हें सताने लगते॥ १८॥

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