drakṣye māyāṃ yayā lokaḥ sapālo veda sadbhidām|| 6
अर्थ
पवित्रकीर्ति महानुभावोंके शिरोमणि कमलनयन! फिर भी आपकी आज्ञाके अनुसार मैं आपसे वर माँगता हूँ। मैं आपकी वह माया देखना चाहता हूँ, जिससे मोहित होकर सभी लोक और लोकपाल अद्वितीय वस्तु ब्रह्ममें अनेकों प्रकारके भेद-विभेद देखने लगते हैं॥ ६॥✎ 1784
अथाप्यम्बुजपत्राक्ष पुण्यश्लोकशिखामणे।
द्रक्ष्ये मायां यया लोकः सपालो वेद सद्भिदाम्॥ ६
पवित्रकीर्ति महानुभावोंके शिरोमणि कमलनयन! फिर भी आपकी आज्ञाके अनुसार मैं आपसे वर माँगता हूँ। मैं आपकी वह माया देखना चाहता हूँ, जिससे मोहित होकर सभी लोक और लोकपाल अद्वितीय वस्तु ब्रह्ममें अनेकों प्रकारके भेद-विभेद देखने लगते हैं॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.9.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 954) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/9/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)