श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.9.5

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

गृहीत्वाजादयो यस्य श्रीमत्पादाब्जदर्शनम्।

मनसा योगपक्वेन स भवान् मेऽक्षगोचरः॥ ५

gṛhītvājādayo yasya śrīmatpādābjadarśanam|

manasā yogapakvena sa bhavān me'kṣagocaraḥ|| 5

अर्थ

ब्रह्मा-शंकर आदि देवगण योग-साधनाके द्वारा एकाग्र हुए मनसे ही आपके परम सुन्दर श्रीचरणकमलोंका दर्शन प्राप्त करके कृतार्थ हो गये हैं। आज उन्हीं आपने मेरे नेत्रोंके सामने प्रकट होकर मुझे धन्य बनाया है॥ ५॥✎ 1784

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1784 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: शरणागत-भयहारी → शरणागतभयहारी

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