जब उनकी इच्छा बोलनेकी हुई तब वाक्-इन्द्रिय, उसके अधिष्ठातृदेवता अग्नि और उनका विषय बोलना—ये तीनों प्रकट हुए। इसके बाद बहुत दिनोंतक उस जलमें ही वे रुके रहे॥ १९॥
विवक्षोर्मुखतो भूम्नो वह्निर्वाग् व्याहृतं तयोः।
जले वै तस्य सुचिरं निरोधः समजायत॥ १९
जब उनकी इच्छा बोलनेकी हुई तब वाक्-इन्द्रिय, उसके अधिष्ठातृदेवता अग्नि और उनका विषय बोलना—ये तीनों प्रकट हुए। इसके बाद बहुत दिनोंतक उस जलमें ही वे रुके रहे॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.10.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 230) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/10/19/