श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.10.31

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

त्वक्चर्ममांसरुधिरमेदोमज्जास्थिधातवः ।

भूम्यप्तेजोमयाः सप्त प्राणो व्योमाम्बुवायुभिः॥ ३१

tvakcarmamāṃsarudhiramedomajjāsthidhātavaḥ |

bhūmyaptejomayāḥ sapta prāṇo vyomāmbuvāyubhiḥ|| 31

अर्थ

विराट् पुरुषके शरीरमें पृथ्वी, जल और तेजसे सात धातुएँ प्रकट हुईं—त्वचा, चर्म, मांस, रुधिर, मेद, मज्जा और अस्थि। इसी प्रकार आकाश, जल और वायुसे प्राणोंकी उत्पत्ति हुई॥ ३१॥

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