॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 2.10.34
अतः परं सूक्ष्मतममव्यक्तं निर्विशेषणम्।
अनादिमध्यनिधनं नित्यं वाङ्मनसः परम्॥ ३४
ataḥ paraṃ sūkṣmatamamavyaktaṃ nirviśeṣaṇam|
anādimadhyanidhanaṃ nityaṃ vāṅmanasaḥ param|| 34
अर्थ
इससे परे भगवान्का अत्यन्त सूक्ष्मरूप है। वह अव्यक्त, निर्विशेष, आदि, मध्य और अन्तसे रहित एवं नित्य है। वाणी और मनकी वहाँतक पहुँच नहीं है॥ ३४॥