श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.10.43

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

ततः कालाग्‍निरुद्रात्मा यत्सृष्टमिदमात्मनः।

संनियच्छति कालेन२ घनानीकमिवानिलः॥ ४३

tataḥ kālāgnirudrātmā yatsṛṣṭamidamātmanaḥ|

saṃniyacchati kālena ghanānīkamivānilaḥ|| 43

अर्थ

प्रलयका समय आनेपर वे ही भगवान् अपने बनाये हुए इस विश्‍वको कालाग्‍निस्वरूप रुद्रका रूप ग्रहण करके अपनेमें वैसे ही लीन कर लेते हैं, जैसे वायु मेघमालाको॥ ४३॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—तत्काले।

    (मुद्रित पृष्ठ 233)

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