प्रलयका समय आनेपर वे ही भगवान् अपने बनाये हुए इस विश्वको कालाग्निस्वरूप रुद्रका रूप ग्रहण करके अपनेमें वैसे ही लीन कर लेते हैं, जैसे वायु मेघमालाको॥ ४३॥
ततः कालाग्निरुद्रात्मा यत्सृष्टमिदमात्मनः।
संनियच्छति कालेन घनानीकमिवानिलः॥ ४३
प्रलयका समय आनेपर वे ही भगवान् अपने बनाये हुए इस विश्वको कालाग्निस्वरूप रुद्रका रूप ग्रहण करके अपनेमें वैसे ही लीन कर लेते हैं, जैसे वायु मेघमालाको॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.10.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 233) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/10/43/