सौन्दर्यकी चाहसे गन्धर्वोंकी, पत्नीकी प्राप्तिके लिये उर्वशी अप्सराकी और सबका स्वामी बननेके लिये ब्रह्माकी आराधना करनी चाहिये॥ ६॥✎ 122123124125126128612871288
रूपाभिकामो गन्धर्वान् स्त्रीकामोऽप्सरउर्वशीम्।
आधिपत्यकामः सर्वेषां यजेत परमेष्ठिनम्॥ ६
सौन्दर्यकी चाहसे गन्धर्वोंकी, पत्नीकी प्राप्तिके लिये उर्वशी अप्सराकी और सबका स्वामी बननेके लिये ब्रह्माकी आराधना करनी चाहिये॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.3.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 193) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/3/6/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (8)