श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.4.24

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

नमस्तस्मै भगवते वासुदेवाय वेधसे।

पपुर्ज्ञानमयं सौम्या यन्मुखाम्बुरुहासवम्॥ २४

namastasmai bhagavate vāsudevāya vedhase|

papurjñānamayaṃ saumyā yanmukhāmburuhāsavam|| 24

अर्थ

संत पुरुष जिनके मुखकमलसे मकरन्दके समान झरती हुई ज्ञानमयी सुधाका पान करते रहते हैं उन वासुदेवावतार सर्वज्ञ भगवान् व्यासके चरणोंमें मेरा बार-बार नमस्कार है॥ २४॥✎ 134 135

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #134 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #135 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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