तुमने मेरे विषयमें जो कुछ कहा है, तुम्हारा वह कथन भी असत्य नहीं है; क्योंकि जबतक मुझसे परेका तत्त्व—जो स्वयं भगवान् ही हैं—जान नहीं लिया जाता, तबतक मेरा ऐसा ही प्रभाव प्रतीत होता है॥ १०॥✎ 1361581
नानृतं तव तच्चापि यथा मां प्रब्रवीषि भोः।
अविज्ञाय परं मत्त एतावत्त्वं यतो हि मे॥ १०
तुमने मेरे विषयमें जो कुछ कहा है, तुम्हारा वह कथन भी असत्य नहीं है; क्योंकि जबतक मुझसे परेका तत्त्व—जो स्वयं भगवान् ही हैं—जान नहीं लिया जाता, तबतक मेरा ऐसा ही प्रभाव प्रतीत होता है॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 200) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/5/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)