श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.5.19

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

कार्यकारणकर्तृत्वे द्रव्यज्ञानक्रियाश्रयाः।

बध्नन्ति नित्यदा मुक्तं मायिनं पुरुषं गुणाः॥ १९

kāryakāraṇakartṛtve dravyajñānakriyāśrayāḥ|

badhnanti nityadā muktaṃ māyinaṃ puruṣaṃ guṇāḥ|| 19

अर्थ

ये ही तीनों गुण द्रव्य, ज्ञान और क्रियाका आश्रय लेकर मायातीत नित्यमुक्त पुरुषको ही मायामें स्थित होनेपर कार्य, कारण और कर्तापनके अभिमानसे बाँध लेते हैं॥ १९॥✎ 136 1581

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #136 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से
  • #1581 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: इच्छा-नुसार → इच्छानुसार

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