॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 2.5.3
सर्वं ह्येतद् भवान् वेद भूतभव्यभवत्प्रभुः।
करामलकवद् विश्वं विज्ञानावसितं तव॥ ३
sarvaṃ hyetad bhavān veda bhūtabhavyabhavatprabhuḥ|
karāmalakavad viśvaṃ vijñānāvasitaṃ tava|| 3
अर्थ
आप तो यह सब कुछ जानते हैं; क्योंकि जो कुछ हुआ है, हो रहा है या होगा, उसके स्वामी आप ही हैं। यह सारा संसार हथेलीपर रखे हुए आँवलेके समान आपकी ज्ञान-दृष्टिके अन्तर्गत ही है॥ ३॥