॥ श्रीहरिः ॥
ग्रीवायां जनलोकश्च तपोलोकः स्तनद्वयात्।
मूर्धभिः सत्यलोकस्तु ब्रह्मलोकः सनातनः॥ ३९
grīvāyāṃ janalokaśca tapolokaḥ stanadvayāt|
mūrdhabhiḥ satyalokastu brahmalokaḥ sanātanaḥ|| 39
अर्थ
उसके गलेमें जनलोक, दोनों स्तनोंमें तपोलोक और मस्तकमें ब्रह्माका नित्य निवासस्थान सत्यलोक है॥ ३९॥✎ 139 140
ग्रीवायां जनलोकश्च तपोलोकः स्तनद्वयात्।
मूर्धभिः सत्यलोकस्तु ब्रह्मलोकः सनातनः॥ ३९
उसके गलेमें जनलोक, दोनों स्तनोंमें तपोलोक और मस्तकमें ब्रह्माका नित्य निवासस्थान सत्यलोक है॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.5.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 202) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/5/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
- #139 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्ने
- #140 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्ने