तदनन्तर तुम्हारे बड़े भाई इन नौ प्रजापतियोंने अपने चित्तको पूर्ण समाहित करके विराट् एवं अन्तर्यामीरूपसे स्थित उस पुरुषकी आराधना की॥ २८॥✎ 141142
ततस्ते भ्रातर इमे प्रजानां पतयो नव।
अयजन् व्यक्तमव्यक्तं पुरुषं सुसमाहिताः॥ २८
तदनन्तर तुम्हारे बड़े भाई इन नौ प्रजापतियोंने अपने चित्तको पूर्ण समाहित करके विराट् एवं अन्तर्यामीरूपसे स्थित उस पुरुषकी आराधना की॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.6.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 206) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/6/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)