श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.7.26

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

भूमेः सुरेतरवरूथविमर्दितायाः

क्लेशव्ययाय कलया सितकृष्णकेशः।

जातः करिष्यति जनानुपलक्ष्यमार्गः

कर्माणि चात्ममहिमोपनिबन्धनानि ॥ २६

bhūmeḥ suretaravarūthavimarditāyāḥ

kleśavyayāya kalayā sitakṛṣṇakeśaḥ|

jātaḥ kariṣyati janānupalakṣyamārgaḥ

karmāṇi cātmamahimopanibandhanāni || 26

अर्थ

जिस समय झुंड-के-झुंड दैत्य पृथ्वीको रौंद डालेंगे उस समय उसका भार उतारनेके लिये भगवान् अपने सफेद और काले केशसे बलराम और श्रीकृष्णके रूपमें कलावतार ग्रहण करेंगे।* वे अपनी महिमाको प्रकट करनेवाले इतने अद्भुत चरित्र करेंगे कि संसारके मनुष्य उनकी लीलाओंका रहस्य बिलकुल नहीं समझ सकेंगे॥ २६॥

टिप्पणियाँ

  1. *

    केशोंके अवतार कहनेका अभिप्राय यह है कि पृथ्वीका भार उतारनेके लिये भगवान्‌का एक केश ही काफी है इसके अतिरिक्त श्रीबलरामजी और श्रीकृष्णके वर्णोंकी सूचना देनेके लिये भी उन्हें क्रमशः सफेद और काले केशोंका अवतार कहा गया है। वस्तुतः श्रीकृष्ण तो पूर्णपुरुष स्वयं भगवान् हैं—कृष्णस्तु भगवान् स्वयम्।

    (मुद्रित पृष्ठ 213)

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