जब कालियनागके विषसे दूषित हुआ यमुना-जल पीकर बछड़े और गोपबालक मर जायँगे, तब वे अपनी सुधामयी कृपा-दृष्टिकी वर्षासे ही उन्हें जीवित कर देंगे और यमुना-जलको शुद्ध करनेके लिये वे उसमें विहार करेंगे तथा विषकी शक्तिसे जीभ लपलपाते हुए कालियनागको वहाँसे निकाल देंगे॥ २८॥
यद् वै व्रजे व्रजपशून् विषतोयपीथान्
पालांस्त्वजीवयदनुग्रहदृष्टिवृष्ट्या।
तच्छुद्धयेऽतिविषवीर्यविलोलजिह्व-
मुच्चाटयिष्यदुरगं विहरन् ह्रदिन्याम्॥ २८
जब कालियनागके विषसे दूषित हुआ यमुना-जल पीकर बछड़े और गोपबालक मर जायँगे, तब वे अपनी सुधामयी कृपा-दृष्टिकी वर्षासे ही उन्हें जीवित कर देंगे और यमुना-जलको शुद्ध करनेके लिये वे उसमें विहार करेंगे तथा विषकी शक्तिसे जीभ लपलपाते हुए कालियनागको वहाँसे निकाल देंगे॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.7.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 214) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/7/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#999 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हृदिन्याम्॥ → ह्रदिन्याम्॥