श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.8.21

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

सम्प्लवः सर्वभूतानां विक्रमः प्रतिसंक्रमः।

इष्टापूर्तस्य काम्यानां त्रिवर्गस्य च यो विधिः॥ २१

samplavaḥ sarvabhūtānāṃ vikramaḥ pratisaṃkramaḥ|

iṣṭāpūrtasya kāmyānāṃ trivargasya ca yo vidhiḥ|| 21

अर्थ

समस्त प्राणियोंकी उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय कैसे होता है? बावली, कुआँ खुदवाना आदि स्मार्त्त, यज्ञ-यागादि वैदिक एवं काम्य कर्मोंकी तथा अर्थ-धर्म-कामके साधनोंकी विधि क्या है?॥ २१॥✎ 167 168

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #167 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #168 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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