श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.8.25

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

अत्र प्रमाणं हि भवान् परमेष्ठी यथाऽऽत्मभूः।

परे चेहानुतिष्ठन्ति पूर्वेषां पूर्वजैः कृतम्॥ २५

atra pramāṇaṃ hi bhavān parameṣṭhī yathā''tmabhūḥ|

pare cehānutiṣṭhanti pūrveṣāṃ pūrvajaiḥ kṛtam|| 25

अर्थ

इस विषयमें आप स्वयम्भू ब्रह्माके समान परम प्रमाण हैं। दूसरे लोग तो अपनी पूर्वपरम्परासे सुनी-सुनायी बातोंका ही अनुष्ठान करते हैं॥ २५॥✎ 167 168

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #167 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #168 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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