श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.9.14

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

ददर्श तत्राखिलसात्वतां पतिं

श्रियः पतिं यज्ञपतिं जगत्पतिम्।

सुनन्दनन्दप्रब२लार्हणादिभिः

स्वपार्षदमुख्यैः परिसेवितं विभुम्॥ १४

dadarśa tatrākhilasātvatāṃ patiṃ

śriyaḥ patiṃ yajñapatiṃ jagatpatim|

sunandanandaprabalārhaṇādibhiḥ

svapārṣadamukhyaiḥ parisevitaṃ vibhum|| 14

अर्थ

ब्रह्माजीने देखा कि उस दिव्य लोकमें समस्त भक्तोंके रक्षक, लक्ष्मीपति, यज्ञपति एवं विश्‍वपति भगवान् विराजमान हैं। सुनन्द, नन्द, प्रबल और अर्हण आदि मुख्य-मुख्य पार्षदगण उन प्रभुकी सेवा कर रहे हैं॥ १४॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—प्रमुखा०।

    (मुद्रित पृष्ठ 223)

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