॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 2.9.14
ददर्श तत्राखिलसात्वतां पतिं
श्रियः पतिं यज्ञपतिं जगत्पतिम्।
सुनन्दनन्दप्रब२लार्हणादिभिः
स्वपार्षदमुख्यैः परिसेवितं विभुम्॥ १४
dadarśa tatrākhilasātvatāṃ patiṃ
śriyaḥ patiṃ yajñapatiṃ jagatpatim|
sunandanandaprabalārhaṇādibhiḥ
svapārṣadamukhyaiḥ parisevitaṃ vibhum|| 14
अर्थ
ब्रह्माजीने देखा कि उस दिव्य लोकमें समस्त भक्तोंके रक्षक, लक्ष्मीपति, यज्ञपति एवं विश्वपति भगवान् विराजमान हैं। सुनन्द, नन्द, प्रबल और अर्हण आदि मुख्य-मुख्य पार्षदगण उन प्रभुकी सेवा कर रहे हैं॥ १४॥
टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—प्रमुखा०।