श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.1.10

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

यदोपहूतो भवनं प्रविष्टो

मन्त्राय पृष्टः किल पूर्वजेन।

अथाह तन्मन्त्रदृशां वरीयान्

यन्मन्त्रिणो वैदुरिकं वदन्ति॥ १०

yadopahūto bhavanaṃ praviṣṭo

mantrāya pṛṣṭaḥ kila pūrvajena|

athāha tanmantradṛśāṃ varīyān

yanmantriṇo vaidurikaṃ vadanti|| 10

अर्थ

फिर जब सलाहके लिये विदुरजीको बुलाया गया, तब मन्त्रियोंमें श्रेष्ठ विदुरजीने राज्यभवनमें जाकर बड़े भाई धृतराष्ट्रके पूछनेपर उन्हें वह सम्मति दी, जिसे नीति-शास्त्रके जाननेवाले पुरुष ‘विदुरनीति’ कहते हैं॥ १०॥

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