प्यारे उद्धवजी! यादवोंके सेनापति वीरवर प्रद्युम्नजी तो प्रसन्न हैं न, जो पूर्वजन्ममें कामदेव थे तथा जिन्हें देवी रुक्मिणीजीने ब्राह्मणोंकी आराधना करके भगवान्से प्राप्त किया था॥ २८॥✎ 1861294
कच्चिद्वरूथाधिपतिर्यदूनां
प्रद्युम्न आस्ते सुखमङ्ग वीरः।
यं रुक्मिणी भगवतोऽभिलेभे
आराध्य विप्रान् स्मरमादिसर्गे॥ २८
प्यारे उद्धवजी! यादवोंके सेनापति वीरवर प्रद्युम्नजी तो प्रसन्न हैं न, जो पूर्वजन्ममें कामदेव थे तथा जिन्हें देवी रुक्मिणीजीने ब्राह्मणोंकी आराधना करके भगवान्से प्राप्त किया था॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.1.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 238) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/1/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)