सौम्य! अपने पिता श्रीकृष्णके समान समस्त रथियोंमें अग्रगण्य श्रीकृष्णतनय साम्ब सकुशल तो हैं न? ये पहले पार्वतीजीके द्वारा गर्भमें धारण किये हुए स्वामिकार्तिक हैं। अनेकों व्रत करके जाम्बवतीने इन्हें जन्म दिया था॥ ३०॥✎ 18712951296
कच्चिद्धरेः सौम्य सुतः सदृक्ष
आस्तेऽग्रणी रथिनां साधु साम्बः।
असूत यं जाम्बवती व्रताढ्या
देवं गुहं योऽम्बिकया धृतोऽग्रे॥ ३०
सौम्य! अपने पिता श्रीकृष्णके समान समस्त रथियोंमें अग्रगण्य श्रीकृष्णतनय साम्ब सकुशल तो हैं न? ये पहले पार्वतीजीके द्वारा गर्भमें धारण किये हुए स्वामिकार्तिक हैं। अनेकों व्रत करके जाम्बवतीने इन्हें जन्म दिया था॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.1.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 239) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/1/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#187 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णु-भगवान् की → विष्णु-भगवान्की
#1295 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): विष्णु-भगवान्की → विष्णुभगवान्की
#1296 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): स्वामि-कार्तिक → स्वामिकार्तिक