जिन्होंने अर्जुनसे रहस्ययुक्त धनुर्विद्याकी शिक्षा पायी है, वे सात्यकि तो कुशलपूर्वक हैं? वे भगवान् श्रीकृष्णकी सेवासे अनायास ही भगवज्जनोंकी उस महान् स्थितिपर पहुँच गये हैं, जो बड़े-बड़े योगियोंको भी दुर्लभ है॥ ३१॥✎ 18712951296
क्षेमं स कच्चिद्युयुधान आस्ते
यः फाल्गुनाल्लब्धधनूरहस्यः।
लेभेऽञ्जसाधोक्षजसेवयैव
गतिं तदीयां यतिभिर्दुरापाम्॥ ३१
जिन्होंने अर्जुनसे रहस्ययुक्त धनुर्विद्याकी शिक्षा पायी है, वे सात्यकि तो कुशलपूर्वक हैं? वे भगवान् श्रीकृष्णकी सेवासे अनायास ही भगवज्जनोंकी उस महान् स्थितिपर पहुँच गये हैं, जो बड़े-बड़े योगियोंको भी दुर्लभ है॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.1.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 239) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/1/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#187 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णु-भगवान् की → विष्णु-भगवान्की
#1295 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): विष्णु-भगवान्की → विष्णुभगवान्की
#1296 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): स्वामि-कार्तिक → स्वामिकार्तिक