॥ श्रीहरिः ॥
यदर्धमायुषस्तस्य परार्धमभिधीयते।
पूर्वः परार्धोऽपक्रान्तो ह्यपरोऽद्य प्रवर्तते॥ ३३
yadardhamāyuṣastasya parārdhamabhidhīyate|
pūrvaḥ parārdho'pakrānto hyaparo'dya pravartate|| 33
अर्थ
ब्रह्माजीकी आयुके आधे भागको परार्ध कहते हैं। अबतक पहला परार्ध तो बीत चुका है, दूसरा चल रहा है॥ ३३॥
यदर्धमायुषस्तस्य परार्धमभिधीयते।
पूर्वः परार्धोऽपक्रान्तो ह्यपरोऽद्य प्रवर्तते॥ ३३
ब्रह्माजीकी आयुके आधे भागको परार्ध कहते हैं। अबतक पहला परार्ध तो बीत चुका है, दूसरा चल रहा है॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.11.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 285) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/11/33/