श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.11.33

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

यदर्धमायुषस्तस्य परार्धमभिधीयते।

पूर्वः परार्धोऽपक्रान्तो ह्यपरोऽद्य प्रवर्तते॥ ३३

yadardhamāyuṣastasya parārdhamabhidhīyate|

pūrvaḥ parārdho'pakrānto hyaparo'dya pravartate|| 33

अर्थ

ब्रह्माजीकी आयुके आधे भागको परार्ध कहते हैं। अबतक पहला परार्ध तो बीत चुका है, दूसरा चल रहा है॥ ३३॥

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