श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.21

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

अथाभिध्यायतः सर्गं दश पुत्राः प्रजज्ञिरे।

भगवच्छक्तियुक्तस्य लोकसन्तानहेतवः॥ २१

athābhidhyāyataḥ sargaṃ daśa putrāḥ prajajñire|

bhagavacchaktiyuktasya lokasantānahetavaḥ|| 21

अर्थ

इसके पश्चात् जब भगवान्‌की शक्तिसे सम्पन्‍न ब्रह्माजीने सृष्टिके लिये संकल्प किया, तब उनके दस पुत्र और उत्पन्‍न हुए। उनसे लोककी बहुत वृद्धि हुई॥ २१॥✎ 250 1304 1305

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #250 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #1304 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति॥ → निऋर्ऋति॥
  • #1305 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति॥ → निर्ऋति॥

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