श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.22

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

मरीचिरत्र्यङ्गिरसौ पुलस्त्यः पुलहः क्रतुः।

भृगुर्वसिष्ठो दक्षश्‍च दशमस्तत्र नारदः॥ २२

marīciratryaṅgirasau pulastyaḥ pulahaḥ kratuḥ|

bhṛgurvasiṣṭho dakṣaśca daśamastatra nāradaḥ|| 22

अर्थ

उनके नाम मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, भृगु, वसिष्ठ, दक्ष और दसवें नारद थे॥ २२॥✎ 250 1304 1305

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #250 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #1304 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति॥ → निऋर्ऋति॥
  • #1305 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति॥ → निर्ऋति॥

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