तुम अपनी इस भार्यासे अपने ही समान गुणवती सन्तति उत्पन्न करके धर्मपूर्वक पृथ्वीका पालन करो और यज्ञोंद्वारा श्रीहरिकी आराधना करो॥ ११॥
स त्वमस्यामपत्यानि सदृशान्यात्मनो गुणैः।
उत्पाद्य शास धर्मेण गां यज्ञैः पुरुषं यज॥ ११
तुम अपनी इस भार्यासे अपने ही समान गुणवती सन्तति उत्पन्न करके धर्मपूर्वक पृथ्वीका पालन करो और यज्ञोंद्वारा श्रीहरिकी आराधना करो॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.13.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 293) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/13/11/