उस विशाल वराह-मूर्तिको देखकर मरीचि आदि मुनिजन, सनकादि और स्वायम्भुव मनुके सहित श्रीब्रह्माजी तरह-तरहके विचार करने लगे—॥ २०॥✎ 254
मरीचिप्रमुखैर्विप्रैः कुमारैर्मनुना सह।
दृष्ट्वा तत्सौकरं रूपं तर्कयामास चित्रधा॥ २०
उस विशाल वराह-मूर्तिको देखकर मरीचि आदि मुनिजन, सनकादि और स्वायम्भुव मनुके सहित श्रीब्रह्माजी तरह-तरहके विचार करने लगे—॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.13.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 294) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/13/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#254 शब्दोंके बीचका स्थान: वराहभगवान् की → वराहभगवान्की