हमारे पिता प्रजापति दक्षका अपनी पुत्रियोंपर बड़ा स्नेह था। एक बार उन्होंने हम सबको अलग-अलग बुलाकर पूछा कि ‘तुम किसे अपना पति बनाना चाहती हो?’॥ १२॥✎ 258
पुरा पिता नो भगवान्दक्षो दुहितृवत्सलः।
कं वृणीत वरं वत्सा इत्यपृच्छत नः पृथक्॥ १२
हमारे पिता प्रजापति दक्षका अपनी पुत्रियोंपर बड़ा स्नेह था। एक बार उन्होंने हम सबको अलग-अलग बुलाकर पूछा कि ‘तुम किसे अपना पति बनाना चाहती हो?’॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.14.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 299) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/14/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#258 शब्दोंके बीचका स्थान: जैसेकेलेके → जैसे केलेके