श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.12

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

पुरा पिता नो भगवान्दक्षो दुहितृवत्सलः।

कं वृणीत वरं वत्सा इत्यपृच्छत नः पृथक्॥ १२

purā pitā no bhagavāndakṣo duhitṛvatsalaḥ|

kaṃ vṛṇīta varaṃ vatsā ityapṛcchata naḥ pṛthak|| 12

अर्थ

हमारे पिता प्रजापति दक्षका अपनी पुत्रियोंपर बड़ा स्नेह था। एक बार उन्होंने हम सबको अलग-अलग बुलाकर पूछा कि ‘तुम किसे अपना पति बनाना चाहती हो?’॥ १२॥✎ 258

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #258 शब्दोंके बीचका स्थान: जैसेकेलेके → जैसे केलेके

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