श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.11

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

भर्तर्याप्तोरुमानानां लोकानाविशते यशः।

पतिर्भवद्विधो यासां प्रजया ननु जायते॥ ११

bhartaryāptorumānānāṃ lokānāviśate yaśaḥ|

patirbhavadvidho yāsāṃ prajayā nanu jāyate|| 11

अर्थ

जिनके गर्भसे आप-जैसा पति पुत्ररूपसे उत्पन्‍न होता है, वे ही स्त्रियाँ अपने पतियोंसे सम्मानिता समझी जाती हैं। उनका सुयश संसारमें सर्वत्र फैल जाता है॥ ११॥✎ 258

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #258 शब्दोंके बीचका स्थान: जैसेकेलेके → जैसे केलेके

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