श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.18

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

यामाहुरात्मनो ह्यर्धं श्रेयस्कामस्य मानिनि।

यस्यां स्वधुरमध्यस्य पुमांश्‍चरति विज्वरः॥ १८

yāmāhurātmano hyardhaṃ śreyaskāmasya mānini|

yasyāṃ svadhuramadhyasya pumāṃścarati vijvaraḥ|| 18

अर्थ

मानिनि! स्त्रीको तो त्रिविध पुरुषार्थकी कामनावाले पुरुषका आधा अंग कहा गया है। उसपर अपनी गृहस्थीका भार डालकर पुरुष निश्चिन्त होकर विचरता है॥ १८॥

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