दिति बोलीं—ब्रह्मन्! भगवान् रुद्र भूतोंके स्वामी हैं, मैंने उनका अपराध किया है; किन्तु वे भूतश्रेष्ठ मेरे इस गर्भको नष्ट न करें॥ ३३॥✎ 259
मा मे गर्भमिमं ब्रह्मन् भूतानामृषभो वधीत्।
रुद्रः पतिर्हि भूतानां यस्याकरवमंहसम्॥ ३३
दिति बोलीं—ब्रह्मन्! भगवान् रुद्र भूतोंके स्वामी हैं, मैंने उनका अपराध किया है; किन्तु वे भूतश्रेष्ठ मेरे इस गर्भको नष्ट न करें॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.14.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 302) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/14/33/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#259 शब्दोंके बीचका स्थान: भूतोंकेस्वामी → भूतोंके स्वामी