श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.18.15

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

भगवांस्तु गदावेगं विसृष्टं रिपुणोरसि।

अवञ्चयत्तिरश्चीनो योगारूढ इवान्तकम्॥ १५

bhagavāṃstu gadāvegaṃ visṛṣṭaṃ ripuṇorasi|

avañcayattiraścīno yogārūḍha ivāntakam|| 15

अर्थ

किन्तु भगवान्‌ने अपनी छातीपर चलायी हुई शत्रुकी गदाके प्रहारको कुछ टेढ़े होकर बचा लिया—ठीक वैसे ही, जैसे योगसिद्ध पुरुष मृत्युके आक्रमणसे अपनेको बचा लेता है॥ १५॥✎ 279

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #279 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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