श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.18.9

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

परानुषक्तं तपनीयोपकल्पं

महागदं काञ्चनचित्रदंशम्।

मर्माण्यभीक्ष्णं प्रतुदन्तं दुरुक्तैः

प्रचण्डमन्युः प्रहसंस्तं बभाषे॥ ९

parānuṣaktaṃ tapanīyopakalpaṃ

mahāgadaṃ kāñcanacitradaṃśam|

marmāṇyabhīkṣṇaṃ pratudantaṃ duruktaiḥ

pracaṇḍamanyuḥ prahasaṃstaṃ babhāṣe|| 9

अर्थ

तब श्रीहरिने बड़ी भारी गदा लिये अपने पीछे आ रहे हिरण्याक्षसे, जो सोनेके आभूषण और अद्भुत कवच धारण किये था तथा अपने कटुवाक्योंसे उन्हें निरन्तर मर्माहत कर रहा था, अत्यन्त क्रोधपूर्वक हँसते हुए कहा॥ ९॥✎ 274

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #274 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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