श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.19.16

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

तेनेत्थमाहतः क्षत्तर्भगवानादिसूकरः।

नाकम्पत मनाक् क्‍वापि स्रजा हत इव द्विपः॥ १६

tenetthamāhataḥ kṣattarbhagavānādisūkaraḥ|

nākampata manāk kvāpi srajā hata iva dvipaḥ|| 16

अर्थ

विदुरजी! जैसे हाथीपर पुष्पमालाकी चोटका कोई असर नहीं होता, उसी प्रकार उसके इस प्रकार घूँसा मारनेसे भगवान् आदिवराह तनिक भी टस-से-मस नहीं हुए॥ १६॥✎ 286 287

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #286 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #287 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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