विदुरजी! जैसे हाथीपर पुष्पमालाकी चोटका कोई असर नहीं होता, उसी प्रकार उसके इस प्रकार घूँसा मारनेसे भगवान् आदिवराह तनिक भी टस-से-मस नहीं हुए॥ १६॥✎ 286287
तेनेत्थमाहतः क्षत्तर्भगवानादिसूकरः।
नाकम्पत मनाक् क्वापि स्रजा हत इव द्विपः॥ १६
विदुरजी! जैसे हाथीपर पुष्पमालाकी चोटका कोई असर नहीं होता, उसी प्रकार उसके इस प्रकार घूँसा मारनेसे भगवान् आदिवराह तनिक भी टस-से-मस नहीं हुए॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.19.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 326) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/19/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)