तब वह महामायावी दैत्य मायापति श्रीहरिपर अनेक प्रकारकी मायाओंका प्रयोग करने लगा, जिन्हें देखकर सभी प्रजा बहुत डर गयी और समझने लगी कि अब संसारका प्रलय होनेवाला है॥ १७॥✎ 286287
अथोरुधासृजन्मायां योगमायेश्वरे हरौ।
यां विलोक्य प्रजास्त्रस्ता मेनिरेऽस्योपसंयमम्॥ १७
तब वह महामायावी दैत्य मायापति श्रीहरिपर अनेक प्रकारकी मायाओंका प्रयोग करने लगा, जिन्हें देखकर सभी प्रजा बहुत डर गयी और समझने लगी कि अब संसारका प्रलय होनेवाला है॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.19.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 326) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/19/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)