श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.19.18

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

प्रववुर्वायवश्‍चण्डास्तमः पांसवमैरयन्।

दिग्भ्यो निपेतुर्ग्रावाणः क्षेपणैः प्रहिता इव॥ १८

pravavurvāyavaścaṇḍāstamaḥ pāṃsavamairayan|

digbhyo nipeturgrāvāṇaḥ kṣepaṇaiḥ prahitā iva|| 18

अर्थ

बड़ी प्रचण्ड आँधी चलने लगी, जिसके कारण धूलसे सब ओर अन्धकार छा गया। सब ओरसे पत्थरोंकी वर्षा होने लगी, जो ऐसे जान पड़ते थे मानो किसी क्षेपणयन्त्र (गुलेल)-से फेंके जा रहे हों॥ १८॥✎ 286 287

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #286 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #287 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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