अब वह भगवान्को वज्रके समान कठोर मुक्कोंसे मारने लगा। तब इन्द्रने जैसे वृत्रासुरपर प्रहार किया था, उसी प्रकार भगवान्ने उसकी कनपटीपर एक तमाचा मारा॥ २५॥✎ 286287
तं मुष्टिभिर्विनिघ्नन्तं वज्रसारैरधोक्षजः।
करेण कर्णमूलेऽहन् यथा त्वाष्ट्रं मरुत्पतिः॥ २५
अब वह भगवान्को वज्रके समान कठोर मुक्कोंसे मारने लगा। तब इन्द्रने जैसे वृत्रासुरपर प्रहार किया था, उसी प्रकार भगवान्ने उसकी कनपटीपर एक तमाचा मारा॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.19.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 327) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/19/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)