punaḥ katipayaiḥ sthānaṃ prapatsyete ha janmabhiḥ|| 29
अर्थ
ये हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु भगवान्के ही पार्षद हैं। इन्हें शापवश यह अधोगति प्राप्त हुई है। अब कुछ जन्मोंमें ये फिर अपने स्थानपर पहुँच जायँगे’॥ २९॥✎ 288
एतौ तौ पार्षदावस्य शापाद्यातावसद्गतिम्।
पुनः कतिपयैः स्थानं प्रपत्स्येते ह जन्मभिः॥ २९
ये हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु भगवान्के ही पार्षद हैं। इन्हें शापवश यह अधोगति प्राप्त हुई है। अब कुछ जन्मोंमें ये फिर अपने स्थानपर पहुँच जायँगे’॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.19.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 327) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/19/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)