श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.2.20

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

तथैव चान्ये नरलोकवीरा

य आहवे कृष्णमुखारविन्दम्।

नेत्रैः पिबन्तो नयनाभिरामं

पार्थास्त्रपूताः पदमापुरस्य॥ २०

tathaiva cānye naralokavīrā

ya āhave kṛṣṇamukhāravindam|

netraiḥ pibanto nayanābhirāmaṃ

pārthāstrapūtāḥ padamāpurasya|| 20

अर्थ

शिशुपालके ही समान महाभारत-युद्धमें जिन दूसरे योद्धाओंने अपनी आँखोंसे भगवान् श्रीकृष्णके नयनाभिराम मुखकमलका मकरन्द पान करते हुए अर्जुनके बाणोंसे बिंधकर प्राणत्याग किया, वे पवित्र होकर सब-के-सब भगवान्‌के परमधामको प्राप्त हो गये॥ २०॥✎ 194 1297 1298

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #194 शब्दोंके बीचका स्थान: जाना—भगवान् की → जाना—भगवान्‌की
  • #1297 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भु्रकुटिविलाससे → भु्रुकुटिविलाससे
  • #1298 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): भु्रुकुटिविलाससे → भ्रुकुटिविलाससे

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