फिर भगवान् ब्रह्माने भावना की कि मैं तेजोमय हूँ और अपने अदृश्य रूपसे साध्यगण एवं पितृगणको उत्पन्न किया॥ ४२॥
ऊर्जस्वन्तं मन्यमान आत्मानं भगवानजः।
साध्यान् गणान् पितृगणान् परोक्षेणासृजत्प्रभुः॥ ४२
फिर भगवान् ब्रह्माने भावना की कि मैं तेजोमय हूँ और अपने अदृश्य रूपसे साध्यगण एवं पितृगणको उत्पन्न किया॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.20.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 333) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/20/42/