श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.32

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

सहाहं स्वांशकलया त्वद्वीर्येण महामुने।

तव क्षेत्रे देवहूत्यां प्रणेष्ये तत्त्वसंहिताम्॥ ३२

sahāhaṃ svāṃśakalayā tvadvīryeṇa mahāmune|

tava kṣetre devahūtyāṃ praṇeṣye tattvasaṃhitām|| 32

अर्थ

महामुने! मैं भी अपने अंश-कलारूपसे तुम्हारे वीर्यद्वारा तुम्हारी पत्‍नी देवहूतिके गर्भमें अवतीर्ण होकर सांख्यशास्त्रकी रचना करूँगा॥ ३२॥

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