श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.21.33

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

मैत्रेय उवाच

एवं तमनुभाष्याथ भगवान् प्रत्यगक्षजः।

जगाम बिन्दुसरसः सरस्वत्या परिश्रितात्॥ ३३

evaṃ tamanubhāṣyātha bhagavān pratyagakṣajaḥ|

jagāma bindusarasaḥ sarasvatyā pariśritāt|| 33

अर्थ

मैत्रेयजी कहते हैं—विदुरजी! कर्दमऋषिसे इस प्रकार सम्भाषण करके, इन्द्रियोंके अन्तर्मुख होनेपर प्रकट होनेवाले श्रीहरि सरस्वती नदीसे घिरे हुए बिन्दुसर-तीर्थसे (जहाँ कर्दमऋषि तप कर रहे थे) अपने लोकको चले गये॥ ३३॥

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