श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.22.19

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

अतो भजिष्ये१ समयेन साध्वीं

यावत्तेजो बिभृयादात्मनो मे।

अतो धर्मान् पारमहंस्यमुख्यान्

शुक्लप्रोक्तान् बहु मन्येऽविहिंस्रान्॥ १९

ato bhajiṣye samayena sādhvīṃ

yāvattejo bibhṛyādātmano me|

ato dharmān pāramahaṃsyamukhyān

śuklaproktān bahu manye'vihiṃsrān|| 19

अर्थ

अतः मैं आपकी इस साध्वी कन्याको अवश्य स्वीकार करूँगा, किन्तु एक शर्तके साथ। जबतक इसके संतान न हो जायगी, तबतक मैं गृहस्थ-धर्मानुसार इसके साथ रहूँगा। उसके बाद भगवान्‌के बताये हुए संन्यासप्रधान हिंसारहित शम-दमादि धर्मोंको ही अधिक महत्त्व दूँगा॥ १९॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—वरिष्ये।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 343)

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