श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.23.34

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

यदा सस्मार ऋषभमृषीणां दयितं पतिम्।

तत्र चास्ते सह स्त्रीभिर्यत्रास्ते स प्रजापतिः॥ ३४

yadā sasmāra ṛṣabhamṛṣīṇāṃ dayitaṃ patim|

tatra cāste saha strībhiryatrāste sa prajāpatiḥ|| 34

अर्थ

विदुरजी! जब देवहूतिने अपने प्रिय पतिदेवका स्मरण किया, तो अपनेको सहेलियोंके सहित वहीं पाया जहाँ प्रजापति कर्दमजी विराजमान थे॥ ३४॥

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