उस समय अपनेको सहस्रों स्त्रियोंके सहित अपने प्राणनाथके सामने देख और इसे उनके योगका प्रभाव समझकर देवहूतिको बड़ा विस्मय हुआ॥ ३५॥
भर्तुः पुरस्तादात्मानं स्त्रीसहस्रवृतं तदा।
निशाम्य तद्योगगतिं संशयं प्रत्यपद्यत॥ ३५
उस समय अपनेको सहस्रों स्त्रियोंके सहित अपने प्राणनाथके सामने देख और इसे उनके योगका प्रभाव समझकर देवहूतिको बड़ा विस्मय हुआ॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.23.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 349) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/23/35/