श्रीब्रह्माजीने कहा—प्रिय कर्दम! तुम दूसरोंको मान देनेवाले हो। तुमने मेरा सम्मान करते हुए जो मेरी आज्ञाका पालन किया है, इससे तुम्हारे द्वारा निष्कपटभावसे मेरी पूजा सम्पन्न हुई है॥ १२॥✎ 3091596
त्वया मेऽपचितिस्तात कल्पिता निर्व्यलीकतः।
यन्मे संजगृहे वाक्यं भवान्मानद मानयन्॥ १२
श्रीब्रह्माजीने कहा—प्रिय कर्दम! तुम दूसरोंको मान देनेवाले हो। तुमने मेरा सम्मान करते हुए जो मेरी आज्ञाका पालन किया है, इससे तुम्हारे द्वारा निष्कपटभावसे मेरी पूजा सम्पन्न हुई है॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 353) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/24/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)