बेटा! तुम सभ्य हो, तुम्हारी ये सुन्दरी कन्याएँ अपने वंशोंद्वारा इस सृष्टिको अनेक प्रकारसे बढ़ावेंगी॥ १४॥✎ 3091596
इमा दुहितरः सभ्य तव वत्स सुमध्यमाः।
सर्गमेतं प्रभावैः स्वैर्बृंहयिष्यन्त्यनेकधा॥ १४
बेटा! तुम सभ्य हो, तुम्हारी ये सुन्दरी कन्याएँ अपने वंशोंद्वारा इस सृष्टिको अनेक प्रकारसे बढ़ावेंगी॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.24.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 353) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/24/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)